Jal Chakra Lesson Plan in Hindi for Geography | जल चक्र पाठ योजना - लेसन प्लान सामाजिक विज्ञान

Jal Chakra Lesson Plan in Hindi for Geography | जल चक्र पाठ योजना - लेसन प्लान सामाजिक विज्ञान

यह सामाजिक अध्ययन के भूगोल का जल चक्र का लेसन प्लान (पाठ योजना )कक्षा पांचवी से दसवीं तक के शिक्षकों के लिए है, और साथ ही साथ D.Ed, B.ed और बीटीसी के सभी समेस्टर में पढ़ रहे छात्रों के लिए है

लेसन प्लान का संक्षिप्त विवरण :

  • Class : 5th 6th 7th 8th 9th and 10th
  • Subject : Social Science - Geography
  • Topic : जल चक्र - बादलो का बनना , बादलो का पानी, वर्षा , पृथ्वी पर जल , लवण एवं अलवण जल
  • Type : Mega Teaching and Real Teaching Lesson Plan


Note: निचे दी गयी सामाजिक विज्ञान पाठ योजना केवल एक उदाहरण मात्र है| जिससे आपको Lesson Plan बनाने का Idea मिलता है| आप खुद की कल्पना शक्ति और प्रतिभा से इसे और बेहतर बना सकते है| और साथ ही साथ कक्षा, नाम, कोर्स, दिनांक, अवधि इत्यादि में बदलाव करके इसे आप अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल कर सकते है|

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Real School Teaching Jal Chakra Lesson Plan in Hindi for Geography Teaching For B.Ed 1st Year, 2nd Year and DELED - जल चक्र पाठ योजना

Date : Duration Of The Peroid :
Pupils Teacher Name : Pupil Teacher Roll Number :
Class : Average Age Of the Pupils :
Subject : Topic :

विषय वस्तु विश्लेषण:

  1. बादलों का बनना
  2. बादलों में पानी
  3. वर्षा होना
  4. पृथ्वी पर जल
  5. अलवण और लवणीय जल
  6. जल चक्र

सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में सामाजिक अध्ययन के बारे में चिंतन व तर्क को बढ़ाना|
  2. विद्यार्थियों में सामाजिक अध्ययन के विषय में रुचि उत्पन्न करना|
  3. विद्यार्थियों में सामाजिक अध्ययन के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना|
  4. विद्यार्थियों के जीवन पर सामाजिक अध्ययन के प्रभाव को समझना|

अनुदेशनात्मक उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों को जल चक्र का ज्ञान हो जाएगा|
  2. विद्यार्थी जलचक्र के प्रति सचेत हो जाएंगे|
  3. विद्यार्थी जल चक्र के महत्व को समझ पाएंगे|
  4. विद्यार्थी जल चक्र को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं|
  5. विद्यार्थी जल चक्र की सूची को समझने में समर्थ हो जाएंगे|
  6. विद्यार्थी जल चक्र की सूची की पहचान कर सकेंगे|

सामान्य सहायक शिक्षण सामग्री: चौक, डस्टर, चौक-बोर्ड, संकेतक आदि|

अनुदेशनात्मक सामग्री:जलचक्र को दर्शाता हुआ चार्ट|

पूर्व ज्ञान परिकल्पना: छात्र-अध्यापिका विद्यार्थियों के ज्ञान का यह अनुमान लगाकर चलती है, कि विद्यार्थियों को जलचक्र के बारे में सामान्य जानकारी होगी|

पूर्व ज्ञान परीक्षण:छात्र-अध्यापिका विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान हेतु निम्नलिखित प्रश्न पूछेंगी|

छात्र-अध्यापिका क्रियाएं: छात्र क्रियाएं:
प्रश्न 1. जल हमारे किस-किस काम आता है? जल हमारे पीने, नहाने, खाने व धोने के काम आता है|
प्रश्न 2. पीने, नहाने, खाने व धोने के लिए जल कहां से प्राप्त होता है? नदियों, तालाबों , नलकूपों, झरनों ,से प्राप्त होता है|
प्रश्न 3. सबसे अधिक जल कहां से प्राप्त होता है? सबसे अधिक जल वर्षा से प्राप्त होता है|
प्रश्न 4. वर्षा कैसे होती है? वर्षा बादलों से होती है|
प्रश्न 5. बादलों में पानी कहां से आता है? समस्यात्मक प्रश्न

उपविषय की घोषणा:छात्रों के अंतिम प्रश्न का संतोषजनक उत्तर ना मिलने पर छात्र-अध्यापिका उप-विषय की घोषणा करेंगी, कि अच्छा बच्चों आज हम जलचक्र के बारे में पढ़ेंगे|

प्रस्तुतीकरण:छात्र-अध्यापिका व्याख्यान विधि व चार्ट के माध्यम से कक्षा में अपना पाठ प्रस्तुत करेंगी|

शिक्षण बिंदु: छात्र-अध्यापिका क्रियाएं: छात्र क्रियाएं: चॉक बोर्ड कार्य:
बादलों में पानी छात्र-अध्यापिका कथन:

छात्र-अध्यापिका कक्षा में आगे से पीछे की ओर घूमते हुए विद्यार्थियों को बताएंगी कि सूर्य के ताप के कारण जल वाष्पित हो जाता है, जो ठंडा होने पर जलवायु संघनित होकर बादलों का रूप ले लेता है| इस प्रकार संघनित जल वाष्पित हो जाता है|

छात्र-अध्यापिका बच्चों से प्रश्न पूछेंगी, कि बादल कैसे बनते हैं

छात्र ध्यान पूर्वक सुनेगे|

विद्यार्थी उत्तर देने में असमर्थ होंगे|

बादलों का बनना छात्र-अध्यापिका कथन:- सूर्य की गर्मी या ताप के कारण जल वाष्पित होने पर ठंडा होकर जलवाष्प संगठित होकर बादलों का रूप ले लेता है उसे ही बादलों का बनना कहते हैं| छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे|
वर्षा छात्र-अध्यापिका चौक-बोर्ड पर लिखते हुए विद्यार्थियों को बताएंगे कि वाष्पित जल संगठित होकर बादलों का रूप ले लेता है, यह वर्षा अथवा वृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरता है जिसे वर्षा कहते हैं| पृथ्वी का यही जल इकट्ठा होता है|
पृथ्वी पर जल छात्र-अध्यापिका क्रियाएं: पृथ्वी का लगभग 3/4 भाग जल से ढका हुआ है| छात्र ध्यान पूर्वक सुनेगे| पृथ्वी का लगभग 3/4 भाग जल से ढका हुआ है|
अलवण और लवणीय जल छात्र-अध्यापिका कक्षा में आगे से पीछे की ओर घूमते हुए प्रश्न पूछेंगी|

प्रश्न – अलवण और लवणीय जल कहाँ पाया जाता है|

छात्र-अध्यापिका कथन: अलवण जल – तालाबों, नदी, भूमिगत जल धारा एवं हिमनद से प्राप्त होता है|

लवणीय जल: महासागरों एवं समुद्र से लवणीय जल प्राप्त होता है|

छात्र उत्तर देने में सक्षम नहीं होंगे| अलवण जल:तालाबों, नदी, भूमिगत जल धारा एवं हिमनद से प्राप्त होता है|

लवणीय जल: महासागरों एवं समुद्र से लवणीय जल प्राप्त होता है|

जल चक्र छात्र-अध्यापिका कथन:: विद्यार्थियों को बताएंगे कि जिस प्रक्रम में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है, और महासागरों वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता है तथा पुनः प्रयोग में लाने के बाद फिर से दोबारा अपना चक्कर पूरा करता है, उसे जलचक्र कहते हैं| जलचक्र:जो महासागरों वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता है उसे जलचक्र कहते हैं|

सामान्यीकरण: ऐसा सामान्यीकरण छात्र-अध्यापिका द्वारा किया जाता है, कि विद्यार्थियों को जल चक्र के बारे में जानकारी हो गई होगी|

पुनरावृत्ति:

  1. बादल कैसे बनते हैं?
  2. वर्षा कैसे होती है?
  3. जल चक्र किसे कहते हैं?

गृहकार्य:

  1. बादलों में पानी कहां से आता है?
  2. लवणीय जल किसे कहते हैं और लवणीय जल के कुछ स्त्रोत बताइए?
  3. जल से क्या अभिप्राय है? इसका हमारे जीवन में क्या महत्व है?


Further Reference:
https://www.learningclassesonline.com/ - Social Studies Lesson Plans in Hindi Social Science Lesson Plans in Hindi for B.Ed

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